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Monday, 29 October 2012

एसएससी परीक्षा में नकल कराते प्रिंसिपल समेत चार गिरफ्तार


एसएससी परीक्षा में नकल कराते प्रिंसिपल समेत चार गिरफ्तार 
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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : एम्स के बाद अब कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) लिपिक वर्ग की परीक्षा में सेंध लगाने का मामला सामने आया है। बाहरी दिल्ली के एक परीक्षा केंद्र पर स्मार्ट फोन की मदद से प्रश्न पत्रों की फोटो ले रहे गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। प्रश्नपत्र को हल करके मोबाइल फोन पर ब्लूटुथ तकनीक के माध्यम से परीक्षार्थियों तक पहुंचाया जाना था। इसकी एवज में प्रति परीक्षार्थी छह लाख रुपये तय किए गए थे।
मामले में पुलिस ने मंगोलपुरी यू ब्लाक सरकारी विद्यालय के प्रिंसिपल कृष्ण कुमार, अवंतिका राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पीटीआइ नरेंद्र दहिया, दिल्ली पुलिस के सिपाही हरीश तथा पेपर लीक करने वाले मनोज को गिरफ्तार कर लिया है। सभी से पूछताछ जारी है। आरोपियों के कब्जे सेसोनी एक्सपीरिया स्मार्ट फोन एवं सेंट्रो कार बरामद की गई है। बरामद स्मार्ट फोन में प्रश्नपत्र के सभी सेट की फोटो कॉपी मौजूद थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी मनोज ने खुलासा किया है कि उसने एसएससी की लिपिक वर्ग परीक्षा का प्रश्नपत्र हल करने के लिए अपने साथियों को पास में ही एक ठिकाने पर बिठा रखा था। वह रोहिणी सेक्टर एक अवंतिका स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पीटीआइ नरेंद्र दहिया से प्रश्नपत्र लेने हरीश के साथ आया था। रविवार को सुबह दस से 12 बजे तक एसएससी द्वारा लिपिक वर्ग के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था। पूरी दिल्ली में इसके लिए परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। बाहरी जिला पुलिस को सूचना मिली कि अवंतिका स्थित सरकारी स्कूल में एक गिरोह पेपर लीक करने का प्रयास करने वाला है। पेपर लीक करने में गिरोह हाई तकनीक का प्रयोग करेगा।
बवाना एसीपी केपीएस मल्होत्र की टीम ने तत्काल स्कूल परिसर में छापेमारी कर मनोज नामक युवक को सोनी एक्सपीरिया फोन के साथ दबोच लिया। जांच में उसमें प्रश्नपत्र के सभी सेट की फोटो मिल गई। उससे पूछताछ के बाद नरेंद्र दहिया और सिपाही हरीश को दबोचा गया। सूत्रों के अनुसार स्कूल के पीटीआइ नरेंद्र दहिया ने ही मनोज को स्कूल परिसर में आने की इजाजत दी थी। परीक्षार्थियों को बांटने के लिए जब प्रश्नपत्रों की सील तोड़ी गई तो उनमें से प्रश्न पत्र पीटीआइ ने ही मनोज को उपलब्ध कराए थे। पुलिस टीम आरोपियों से पता लगाने में जुटी है, कि उनके संपर्क में कितने परीक्षार्थी थे। गिरोह के तार कहां-कहां तक फैले थे।




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