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Sunday, 30 September 2012

पदोन्नति के आदेश से अध्यापकों में खुशी


पदोन्नति के आदेश से अध्यापकों में खुशी
जागरण संवाद केंद्र, कैथल : 2000 में लगे जेबीटी अध्यापकों की पदोन्नति संबंधी मामले में 27 सितंबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को जेबीटी अध्यापकों ने ऐतिहासिक व स्वागत योग्य बताया। इस फैसले लगभग तीन हजार अध्यापकों में खुशी छा गई है। उच्च न्यायालय ने बहुप्रतिक्षित मामले की सुनवाई के बाद 2000 में लगे अध्यापकों की पदोन्नति न करने के हरियाणा सरकार के फैसले की आलोचना की और उन्हे चार माह में पदोन्नति देने के आदेश दिए है।
क्या था मामला : 2006 में हरियाणा सरकार की ओर से 3206 जेबीटी अध्यापकों की भर्ती की गई थी। इसे 2003 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की सुनवाई करते हुए भर्ती हुए अध्यापकों को मामले में पार्टी बनाने से मना कर दिया, लेकिन पूरी भर्ती की सीबीआइ जाच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, अजय चौटाला व तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार आइएएस सहित 56 अधिकारियों को आरोपी बनाया था। रोशन लाल पंवार बनाम हरियाणा राज्य के केस का फैसला करते हुए माननीय न्यायाधीश एजी मसीह ने सरकार द्वारा पदोन्नति न करने के लिए दिए तर्को को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती से संबंधित यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है, लेकिन इस आधार पर इन अध्यापकों को पदोन्नति या अन्य लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है। अध्यापकों को चार माह में पदोन्नति देने के आदेश दिए। अध्यापकों को इस मामले में न्याय मिलने पर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के राज्य वरिष्ठ उपप्रधान सरदार सुखा सिंह, प्रवक्ता दलीप बिश्नोई, रोशन लाल पंवार, बलवान छौत, मनोज नैन, लखविन्द्र सिंह, राजबीर कौल, कुलदीप नैन, अनिल बूरा, राजेश बैनीवाल, अशोक वर्मा, अमरनाथ, राजेन्द्र गुल्यिाणा, अशोक धीमान, राकेश रत्‍‌न, सतबीर बुढाखेड़ा, सतीश फ्रासवाला ने संबंधित अध्यापकों को बधाई दी।

मिड-डे-मील योजना तोड़ सकती दम
नरेश पंवार, कैथल
गैस एजेंसियों द्वारा अचानक स्कूलों में मिड-डे-मील तैयार करने के लिए दिए जाने वाले गैस सिलेंडरों के कीमतों में वृद्धि होने से मिड-डे- मील योजना पर भी अब सीधा असर पड़ेगा।
आज तक साधारण कीमतों पर उपलब्ध होने वाले सिलेंडर अब स्कूलों को 1001 रुपये में दिया जाएगा जो पहले की तुलना में तीन गुणा महंगा प्राप्त होगा।

स्कूलों के लिए गैस सिलेंडर लेने गए अध्यापकों का समूहों को उस समय जोर का झटका लगा जब वे गैस एजेंसी में सिलेंडर लेने गए क्योंकि इस बढ़ोतरी से संबंधित न तो कोई आदेश विभाग से अभी तक स्कूलों में पहुचा है और न ही अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाई गई।
कैसे बनेगा मिड-डे-मील
स्कूलों में खाना तैयार करने के लिए सरकार द्वारा केवल बीस पैसे प्रति बच्चा शुरू से उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे बहुत मुश्किल से स्कूलों में समय पर खाना दिया जा रहा है।
सरकार द्वारा मिड-डे-मील रेसिपी में परिवर्तन करके रोटी व दाल, चावल व सब्जी आदि लागू करने के बाद ईधन की सप्लाई लगभग दोगुनी हो गई लेकिन उसके लिए दी जाने वाली राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। इसके कारण इस व्यवस्था को अनमने ढग से निभाया जा रहा था।
अध्यापकों व स्वयं सहायता समूहों को यह चिंता सताए जा रही है कि आखिर किस प्रकार बीस पैसे प्रति छात्र दी जाने वाली राशि से गैस के सिलेंडर भरवाए जा सकेंगे।
गैस एजेंसियों के कर्मचारियों ने बताया कि इस बारे में उन्हे इ-मेल द्वारा सूचना मिली है कि अब सभी सरकारी व सामाजिक संस्थाओं से प्रति सिलेंडर 1001 रुपये चार्ज किया जाएगा। इसके बारे में अधिक जानकारी तो कम्पनी के बड़े अधिकारी ही दे सकते है।
सरकार गंभीर नहीं : प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के जिला प्रधान रोशन लाल पंवार ने कहा कि सरकार मिड-डे- मील योजना को चलाने में गम्भीर नहीं है। इस दाम पर एजेंसिया मिड-डे- मील सिलेंडर स्कूलों को दे रही है, वह बिना सब्सिडी के मिलने वाले सिलेंडरों से भी ज्यादा है। सरकार चाहती है कि योजना बंद होने का ठीकरा अध्यापकों के सिर पर फोड़ा जा सके, लेकिन प्राथमिक शिक्षक संघ इसे किसी कीमत पर सहन नहीं करेगा।
















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