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Thursday, 7 February 2013


अतिथि अध्यापकों की लगाई जा रही हाजिरी
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संवाद सहयोगी, पाई : हरियाणा पात्र अध्यापक संघ के कानूनी सलाहकार रामफल शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है। शर्मा बुधवार को अपने निवास स्थान पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इन अध्यापकों को हटाने के लिए पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार व शिक्षा बोर्ड को अपने पत्र नम्बर सीडब्ल्यूपी 7121/2010 के तहत आदेश दिए थे कि 20 मार्च 2012 से 322 दिन तक अध्यापकांे को नौकरी पर रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश 5 फरवरी 2013 को पूरे होते हैं, लेकिन अभी छह फरवरी को प्रदेश के स्कूलों में इन अतिथि अध्यापकों की हाजरी लगाई गई। प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किए गए और न ही जिला स्तर पर डीईओ व मौलिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश नहीं दिए गए कि वे अपने क्षेत्रों में इन अतिथि अध्यापकों की 5 फरवरी के बाद हाजरी नहीं लगने दी जाए। न्यायपालिका के आदेशों की पालन न करके प्रदेश सरकार अतिथि अध्यापकों का समर्थन कर रही है। पीजीटी कैडर के मास्टर व लेक्चरार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अतिथि के तौर पर 434 दिन का समय भी जारी किया गया था। सरकार द्वारा बरती जा रही यह ढील पात्र अध्यापकों के साथ अन्याय किया जा रहा है। इस बारे में हरियाणा पात्र अध्यापक संघ बैठक का आयोजन इस बारे में निर्णय लेंगे। नहीं मिले आदेश : इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) जसबीर सिंह ने बताया कि 6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 322 दिन पूरे होते हैं। हरियाणा सरकार की ओर से उनको कोई ऐसे आदेश नहीं मिले कि वे अतिथि अध्यापकों को हाजरी लगाने से रोक सके। अभी नहीं पूरे हुए 322 दिन : राजौंद ब्लॉक के अध्यक्ष अतिथि अध्यापक सतबीर शर्मा सौंगल ने बताया कि 4 फरवरी को एक समाचार पत्र में 322 दिन पूरे होने का समय 16 फरवरी छपा था, जिस कारण से अतिथि अध्यापक अपनी हाजरी लगा रहे हैं। इस बारे में 16 फरवरी को बैठक होगा, जिसमें इस पर विमर्श किया जाएगा।

प्राथमिक शिक्षक संघ का धरना 9 को
संस, सीवन : राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा की बैठक के बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्रस्तावित धरना प्रदर्शन के लिए संघ के सदस्यों ने खंड के स्कूलों में जाकर अध्यापकों से मिले और उन्हें इस रैली में बढ़ चढ़ कर भाग लेने के लिए कहा। जिला महासचिव राकेश र} व कार्यकारी प्रधान राजेश बैनीवाल ने बताया कि प्राथमिक शिक्षक अपनी मांगों को मनवाने के लिए कृत संकल्प हैं। इसके लिए राज्य कार्यकारिणी ने 9 फरवरी को रोहतक में राच्य स्तर पर रैली और धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस रैली में प्रदेश से भारी संख्या में प्राथमिक शिक्षक भाग लेंगे।
इसके लिए उन्होंने जन संपर्क अभियान चलाया है। वह सभी स्कूलों में पहुंचकर अध्यापकों को इस रैली में भाग लेने के लिए न्योता दे रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक सरकारी की शिक्षक व शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ शिक्षा बचाओ सम्मान बचाओ रैली 9 फरवरी को रोहतक में मुख्य मांगों के लिए प्रदर्शन करेंगे। उनकी मुख्य मांगे वर्ष 2000 में चयनित शिक्षकों को मास्टर पदों पर पदोन्नति व सभी विभागीय लाभ देने, सभी प्राथमिक विद्यालयों में मुख्य शिक्षकों के पद को स्वीकृति करते हुए छात्र संख्या की शर्त को हटाया जाए व पंजाब व हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर विभागीय पदोन्नति दी जाए। उच्च योग्यता प्राप्त मुख्य शिक्षक को मिडिल हैड पदोन्नति में शामिल किया जाए। डीएड में जारी इंटर्नशिप को बिना शर्त समाप्त किया जाए और छात्र अध्यापकों के साथ हो रहे अन्याय को खत्म किया जाए। जितना समय इन्टरनशिप हो चुकी है उसका भुगतान किया जाए। इसके साथ ही सभी विद्यालय में उच्च विद्यालय की तरह आधारभूत सुविधाएं : स्वीपर, चौकीदार व सेंटर पर क्लर्क का स्थायी पद स्वीकृत किया जाए।
इस अवसर पर उनके साथ कृष्ण फर्शमाजरा भी साथ थे। बुधवार को उन्होंने फर्शमाजरा, फिरोजपुर, मलिकपुर, डोहर, सीवन, सौथा, पोलड़ के सभी स्कूलों में जन संपर्क अभियान चलाया और सभी को रैली के लिए न्योता दिया।

मिड-डे मील पकाने वाले कुकों का मेहनताना बढ़ा
संजय वर्मा, भिवानी
सरकारी स्कूल में मिड-डे मिल की हांडी में बच्चों के लिए पुलाव पकाने वाले कुकों की आखिर प्राइमरी शिक्षा निदेशालय ने सुध ले ली है। प्राइमरी शिक्षा निदेशालय ने उनके मासिक मेहनताने में 150 रुपये की वृद्धि कर उन्हें राहत प्रदान की है। प्रदेश भर के प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किए गए कुकों को अब तक एक हजार रुपये प्रति माह का मेहनताना दिया जाता रहा है। अब उन्हें हर माह 1150 रुपये का भुगतान किया जाएगा। बढ़ा हुआ मानदेय गत 1 अगस्त 2012 से लागू किया गया है।
प्रदेश भर में तकरीबन 35 हजार कुकों की नियुक्ति की गई है। अकेले भिवानी जिला में दो हजार कुक विभिन्न सरकारी स्कूलों में नियुक्त किए हुए हैं। हरियाणा प्राइमरी शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रदेश भर की राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मिड डे मील का राशन पकाने के लिए 15 अगस्त 2004 में कुकों की नियुक्ति की गई थी। इसके बाद विभाग द्वारा कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मिड डे मील का राशन पकाने के लिए वर्ष 2008 में कुकों की नियुक्ति की गई। इन कुकों की विद्यालय स्तर पर ही शिक्षा निदेशालय ने नियुक्ति की है। हालांकि शिक्षा निदेशालय से मिड डे मील का राशन प्रति बच्च बजट निर्धारित किया हुआ है। मगर कुकों को एकमुश्त ही निवि203अत वेतन पर मेहनताने के रूप में एक हजार रुपयों का भुगतान किया जाता रहा है। लम्बे अर्से से स्कूलों में अस्थायी रूप से नियुक्त कुक अपना मेहनताना बढ़ाए जाने की मांग करते रहे हैं।

पीएचडी फीस में मिली स्कॉलरों को राहत
राजेश सैनी, हिसार
प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों से महंगी पीएचडी कराने वाले गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने इस बार फीस कम कर स्कॉलरों को राहत दे दी है। अर्से से उठ रही मांग व दैनिक जागरण द्वारा उठाए गए मुद्दे के कारण विश्वविद्यालय ने दोगुनी फीस को लगभग आधा कर दिया है। साइंस विषयों में भी पीएचडी की फीस घटाई गई है। इस मुद्दे पर छात्र संगठनों ने लगातार प्रदर्शन कर गुजवि प्रशासन पर दबाव बनाए हुए थे। विश्वविद्यालय ने अब पीएचडी के छात्रों की प्रति सेमेस्टर साढ़े सात हजार रुपये फीस रखी है।
इसके अलावा लाइब्रेरी व इंटरनेट प्रयोग के लिए भी सात-सात सौ रुपये की फीस देनी होगी। वहीं साइंस के विषयों में पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए साढ़े 11 हजार रुपये फीस रखी गई है। गौरतलब है कि एचएयू, केयूके, एमडीयू में जहां प्रत्येक समेस्टर की फीस 3 हजार से 6 हजार के आसपास है, वहीं जीजेयू की फीस दोगुना से भी अधिक थी। जीजेयू में सोशल साइंस (एमबीए, मनोविज्ञान, मास कम्युनिकेशन व एडवरटाइजमेंट) की पीएचडी व साइंस की पीएचडी फीस भी समान रखी गई थी।
गुजवि के रजिस्ट्रार डॉ. आरएस जागलान ने बताया कि पिछले कुछ समय से छात्रों की डिमांड थी कि उनकी पीएचडी की फीस घटाई जाए। उन्होंने कहा इस मांग पर विश्वविद्यालय ने इस बार फीस कुछ घटाई है। अंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ने अब विश्वविद्यालय प्रशासन से एससी के उन छात्रों जिनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम हो में मास्टर डिग्री की भांति पीएचडी की फीस में भी छूट देने की मांग की है।
गेस्ट टीचरों की सेवाएं जारी क्यों: सुप्रीम कोर्टदयानंद शर्मा, चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान के उलट नियमित भर्ती में देरी करने व गेस्ट टीचर की सेवा जारी रखने के खिलाफ कड़ा रूख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार सीधे-सीधे संबंधित अधिकारियों के नाम लेकर आदेशों की अवमानना पर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च 2012 को पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त सुरीना राजन द्वारा दिए गए 322 दिन के भर्ती शेड्यूल संबंधी शपथ पत्र का शक्ति से पालन करने व तब तक अतिथि अध्यापकों की सेवाएं जारी रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि भविष्य में ओर समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। आदेशों की पालना न होने व इस संबंध में दायर अवमानना याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। दायर अवमानना याचिका में यह तथ्य भी रखा गया है कि अभी तक टीजीटी पदों पर नियमित अध्यापकों की भर्ती का विज्ञापन ही जारी नहीं किया गया है जबकि टीजीटी पदों पर हजारों अतिथि अध्यापक कार्य कर रहें हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख व अवमानना नोटिस के मद्देनजर अब सरकार की बजाय संबंधित अधिकारियों पर तलवार लटक गई है। वहीं 322 दिन की समय सीमा पूरी होने के चलते अतिथि अध्यापकों की सेवाएं भी खतरे में पड़ गई हैं।
गेस्ट टीचरों की सेवाएं जारी क्यों: सुप्रीम कोर्ट
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान के उलट नियमित भर्ती में देरी करने व गेस्ट टीचर की सेवा जारी रखने के खिलाफ कड़ा रूख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार सीधे-सीधे संबंधित अधिकारियों के नाम लेकर आदेशों की अवमानना पर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च 2012 को पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त सुरीना राजन द्वारा दिए गए 322 दिन के भर्ती शेड्यूल संबंधी शपथ पत्र का शक्ति से पालन करने व तब तक अतिथि अध्यापकों की सेवाएं जारी रखने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि भविष्य में ओर समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। आदेशों की पालना न होने व इस संबंध में दायर अवमानना याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। दायर अवमानना याचिका में यह तथ्य भी रखा गया है कि अभी तक टीजीटी पदों पर नियमित अध्यापकों की भर्ती का विज्ञापन ही जारी नहीं किया गया है जबकि टीजीटी पदों पर हजारों अतिथि अध्यापक कार्य कर रहें हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख व अवमानना नोटिस के मद्देनजर अब सरकार की बजाय संबंधित अधिकारियों पर तलवार लटक गई है। वहीं 322 दिन की समय सीमा पूरी होने के चलते अतिथि अध्यापकों की सेवाएं भी खतरे में पड़ गई हैं।





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